Babri Demolition: केस के फ़ैसले पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या कहा |

 

Babri Demolition: केस के फ़ैसले पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या कहा |



बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय को कई देशों की मीडिया ने कवर किया है।  बुधवार को अदालत ने इस मामले में निर्णय सुनाते हुए बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। 


 अदालत ने २३०० पैन के अपने आदेश में कहा कि इस मामले में किसी अभियुक्त के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और न्यायाधीश ने कहा कि बाबरी मस्जिद को ढाया जाना सुनियोजित नहीं था। यह अचानक हुआ और इसमें किसी भी अभियुक्त का हाथ में था। 

यह कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।  अदालत के इस फैसले को अलग-अलग देशों की मीडिया ने अलग-अलग ढंग से कवर किया है। 


अमेरिकी अख़बारों ने भी इस फैसले की निंदा की 

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट का शीर्षक रखा है ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद विध्वंस के हिंदू नेताओं को भारतीय न्यायालय ने बरी किया।  लिखता है कि भारत में जहाँ मुस्लमान खुद को पीड़ित महसूस करते हैं वहां १९९२ में हिन्दू राष्ट्रवादियों द्वारा अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। 

Babri Demolition: केस के फ़ैसले पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या कहा |

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है भारतीय न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी के सभी हाई प्रोफाइल नेताओं को जो इस केस में अभियुक्त थे, मुक्त कर दिया है। अदालत के इस निर्णय से देश के मुसलमानों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। जो पहले से ही पीएम मोदी द्वारा भारत को हिंदू राष्ट्र में बदलने के प्रयासों से खतरा महसूस करते हैं। 


अख़बार ने लिखा है कि पहले इस केस में 49 अभियुक्त थे लेकिन केस इतना लम्बा चलने की वजह से १७ अभियुक्तों की मृत्यु हो गयी।  द गार्डियन ने भी  इसे कवर किया है। 


 अखबार ने लिखा है उन ३२ लोगों को अदालत ने क्लीन चिट दे दी है जिन पर 1992 में हिन्दू दंगाइयों को भड़का कर बाबरी मस्जिद गिराने का आरोप था। अख़बार लिखता है कि बाबरी मस्जिद ध्वस्त होने के बाद भारत में धार्मिक दंगे हुए जिसमें लगभग 2000 लोग मारे गए थे। इनमें ज्यादातर मुसलमान थे।  इस घटना को इतिहास में भारतीय समाज के धार्मिक आधार पर विभाजन का एक निर्णायक षंड मन गया है। 


नेपाल और बांग्लादेश के अधिकांश अखबारों और वेबसाइटों ने सीबीआई की विशेष अदालत के आदेश पर एजेंसियों के हवाले से ख़बरें प्रकाशित की हैं। जिनमें आदेश से संबंधित तथ्य शामिल है। बांग्लादेश के बड़े अख़बार ने अपने पाठकों के लिए संबंधित टाइमलाइन प्रकाशित की है जिसके ज़रिये अख़बार ने यह समझाने की कोशिश की है की बीते २८ वर्षों में इस मामले में क्या-क्या हुआ।  


अख़बार में लिखा है कि बाबरी विध्वंस मामले में २ FIR दर्ज की गई थी।  एक FIR अनाम लोगों के खिलाफ थी जिन्होंने ढांचे को गिराया। 

 दूसरी FIR  बीजेपी नेता लाल कृष्णा आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व अन्य नेताओं के खिलाफ थी जिन्होंने विघ्वंस से पहले कथित भड़काऊ भाषण दिए थे। 


खाड़ी देशों की की मीडिया ने क्या कहा -

खाड़ी देशों की मीडिया ने भी इस केस को कवर किया है।  अरब न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट को शीर्षक दिया है "भारतीय अदालत मस्जिद केस के निर्णय से विश्वासघात की दोषी। " 

अख़बार ने लिखा है कि मुसलमानों के धार्मिक स्थल को नष्ट करने की साजिश रचने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता और धार्मिक नेताओं को भारतीय अदालत ने बरी किया। मुस्लिम समुदाय अदालत के इस निर्णय को न्यायपालिका से मिले एक और धोखे की तरह देख रहा है क्योंकि अधिकांश बीजेपी नेताओं और उनके सहयोगियों को बाबरी मस्जिद गिराने का दोषी ठहराया गया था। 


वहीँ गल्फ न्यूज के एडिटर बॉबी नकवी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस पर निर्णय आने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट लिखी है जिसमें एक रिटायर्ड पुलिस अफसर के हवाले से उन्होंने लिखा है कि अगर राज्य सरकार चाहती तो बाबरी को गिरने से बचाया जा सकता था। 


इस रिपोर्ट में बॉबी नखवी ने बहुत सा ब्यौरा दिया है कि 6 दिसंबर 1992 के दिन क्या हुआ था साथ ही कुछ तथ्यों के जरिए उन्होंने यह सवाल उठाने की कोशिश की है की तमाम चश्मदीदों और रिकॉर्ड मौजूद होने के बाद भी अदालत में उन्हें साबित कैसे नहीं किया जा सका। 


पाकिस्तान सर्कार ने भी मोदी सर्कार पर निशाना साधा 

 पाकिस्तान सरकार ने भारतीय न्यायालय के इस आदेश पर आपत्ति जाहिर की है। इमरान खान सर्कार के कुछ नेताओं ने कहा है कि मोदी सरकार का असर न्यायालय के आदेश पर दिखाई दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का ध्यान रखें और उनकी इबादत गाहों की रक्षा करे। 

पाकिस्तान की मीडिआ ने भी बाबरी मस्जिद केस के इस फैसले को काफी तवज्जो दी है।  पाकिस्तानी मीडिया ने अदालत के इस फैसले को विवादित करार दिया है। पाकिस्तान के जियो न्यूज ने कहा कि भारतीय अदालत ने सभी 32 अभियुक्तों को एक विवादित निर्णय के तहत बरी कर दिया। 


वहीं पाकिस्तान के डॉल न्यूज़ ने लिखा है भारतीय कोर्ट ने हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं को बाबरी विध्वंस केस में पर्याप्त साक्ष्य न होने की दलील देते हुए क्लीन चिट दी। 

पाकिस्तान के बड़े अखबारों में शामिल द एक्सप्रेस ट्रिब्यून और उर्दू भाषा के अखबार जंग ने भी इस आदेश को काफी कवरेज दी है।  द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तानी हिंदू बाबरी मस्जिद केस पर अदालत के निर्णय से दुखी हैं।  

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में भी हिंसा हुई थी।  इसे क्रिया की प्रतिक्रिया बताया गया था।  पाकिस्तान में मुसलमानों ने बदले की कार्रवाई करते हुए दर्जनों हिंदू मंदिरों पर हमला कर दिया था। 


Babri Demolition: केस के फ़ैसले पर इंटरनेशनल मीडिया ने क्या कहा |

मुस्लिम बहुसंख्यक पाकिस्तान में लगभग ३० हिंदू मंदिर ऐसे थे जिन्हें निशाना बनाया गया था। इनमे से २५ मंदिर सिंध में स्थित थे जहां पाकिस्तान की 85% हिंदू आबादी रहती है।  भारत के विपरीत पाकिस्तान में तब से अब तक या तो तोड़े गए अधिकांश हिंदू मंदिर दोबारा नए सिरे से बना दिए गए हैं या फिर पुराने मंदिरों की मरम्मत कर दी गई है।  अखबार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा है की भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। लेकिन भारत ऐसा नहीं कर पाया।  



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